2026 : नया साल मुबारक हो — पुरानी सुर्खियों के साथ

2026 : कैलेंडर बदला, लेकिन भारत की खबरें?
2026 : नया साल आया, कैलेंडर बदला, मोबाइल का वॉलपेपर बदला…लेकिन भारत की खबरें? वो ज़रा भी नहीं बदलीं। ऐसा लगा जैसे देश में टाइम आगे नहीं बढ़ रहा, बस न्यूज़ चैनल का रीप्ले बटन दब गया हो। इस साल भी वही सुर्खियाँ रहीं, जो हर साल रहती हैं। आईये पढ़ते हैं कुछ ऐसी कुछ हेडलाइंस –
सबसे पहले, BJP की जीत। हर चुनाव के बाद “BJP की जीत का सिलसिला जारी” वाली हेडलाइन इतनी बार छपी कि अब उसे छापने में स्याही भी बोर हो गई है। उधर कांग्रेस की वापसी हर साल “अब होगी” पर ही अटकी रही।
कांग्रेस भारत की इकलौती पार्टी है जिसकी वापसी हमेशा कमिंग सून रहती है।
संन्यास की खबरें ज़्यादा मैच खेल चुकी
क्रिकेट – साल भर टीवी डिबेट चलती रही — “क्या ये रोहित, विराट या धोनी का आख़िरी मैच है?” लेकिन अगला मैच आते ही वही खिलाड़ी मैदान में मुस्कुराते दिखे। लगता है संन्यास की खबरें ज़्यादा मैच खेल चुकी हैं।
"राजधानी फिर गैस चैंबर बनी"
दिल्ली की हवा ने भी कोई सरप्राइज़ नहीं दिया। हर सर्दी में राजधानी फिर गैस चैंबर बनी और AQI इतना ऊपर चला गया कि मौसम ऐप ने भी हार मान ली। मास्क अब एसेसरी नहीं, ज़रूरत बन गया। एक बड़ी नेता ने तो AQI को टेम्प्रेचर से जोड़ दिया। वो अलग बात है AQI के ांडे सुधारने यां बिगाड़ने के लिए लिया गया पानी वाले टैंकर्स का सहारा।
"रुपया नहीं गिरा, डॉलर बढ़ा"
इधर रुपया फिर फिसल गया। अर्थशास्त्रियों ने समझाया कि ये “अस्थायी गिरावट” है, और रुपया बोला — “मैं हर साल अस्थायी ही गिरता हूँ।” यहां तक कह दिया गया कि रुपया नहीं गिरा, डॉलर बढ़ा है। पाकिस्तान और आतंकवाद पर वही पुराने बयान, वही पुरानी बहसें, बस एंकर के कपड़े नए थे।
"शब्दों को गलत समझा गया"
नेताओं के महिला-विरोधी बयान भी रीसायकल मोड में रहे। बयान आता है, बवाल होता है और फिर वही सफ़ाई — “मेरे शब्दों को गलत समझा गया।” एक रेपिस्ट नेता को छोड़ा गया, और क्रमिनल नेता उसे वधाई देने निकल पड़े। भाषा को लेकर फिर हिंदी बनाम बाकी भाषाओं की बहस छिड़ी, जहाँ असली सवाल भाषा का नहीं, राजनीति का था।
"नाम बदलना इन ट्रेंडिंग"
नाम बदलने का अभियान भी जारी रहा। सोचा गया कि नाम बदलने से इतिहास बदल जाएगा, लेकिन ज़मीनी काम अगली मीटिंग तक टाल दिया गया। नाम बदलना इन ट्रेंडिंग।
“सलमान खान शादी कब करेंगे?”
अंत में, देश के सबसे बड़े सवाल — “सलमान खान शादी कब करेंगे?” और “राहुल गांधी शादी कब करेंगे?” देश कि बड़े-छोटे मुद्दे छोड़कर, अगले साल फिर छपेंगी यह हेडलाइंस।
निष्कर्ष यही है कि भारत में साल बदलते हैं, सरकारें बदलती हैं, लेकिन खबरें नहीं बदलतीं। यहाँ न्यूज़ बनती नहीं, बस रीसायकल होती है। नया साल 2026 मुबारक हो — पुरानी सुर्खियों के साथ।
2026