होमविविधBHU – आयुर्वेद की वैज्ञानिकता और सुरक्षा पर केंद्रित संगोष्ठी सम्पन्न
विविध

BHU – आयुर्वेद की वैज्ञानिकता और सुरक्षा पर केंद्रित संगोष्ठी सम्पन्न

संपादकीय टीम 8 नवंबर 2025 को 11:05 pm बजे
0 views
main image

BHU – “Evolving Standards in Rasa Shastra: Chemistry, Analysis and Safety Concerns”

वाराणसी, 8 नवम्बर — आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग द्वारा “Evolving Standards in Rasa Shastra: Chemistry, Analysis and Safety Concerns” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेदिक औषधियों की वैज्ञानिकता, रासायनिक विश्लेषण और सुरक्षा मानकों पर जनमानस में व्याप्त भ्रांतियों का निराकरण करना था।

मुख्य अतिथि और अध्यक्षीय वक्तव्य मुख्य अतिथि प्रो. के. आर. सी. रेड्डी, कुलपति, महायोगी गुरुगोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर ने अपने वक्तव्य में कहा कि आयुर्वेदिक औषधियाँ यदि आयुष मंत्रालय के मानकों के अनुरूप निर्मित हों, तो वे पूर्णतः सुरक्षित और वैज्ञानिक होती हैं। उन्होंने पोट्टली कल्पना पर आधारित शोधों का उल्लेख करते हुए आयुर्वेद के प्रति अपने अनुभव साझा किए।

BHU – कार्यक्रम की अध्यक्षता मेडिसिन संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने की। उन्होंने आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय को महामना के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि यह समन्वय वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में नई संभावनाओं को जन्म दे सकता है।

BHU

BHU – योग्य विशेषज्ञों की देखरेख में हो

विशेषज्ञ वक्तव्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रो. टी. एन. नागराजा, पूर्व निदेशक, चौधरी ब्रम्ह प्रसाद आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली ने “An Appraisal of Copper Toxicity” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि ताम्र भस्म का प्रयोग आयुर्वेद में सुरक्षित है, बशर्ते वह योग्य विशेषज्ञों की देखरेख में हो। उन्होंने नाड़ी परीक्षा की महत्ता पर भी बल दिया।

प्रो. मल्लिकार्जुन जोशी, पूर्व प्रमुख, भूविज्ञान विभाग ने “Mineralogical Analysis of Minerals and Metals” विषय पर व्याख्यान में बताया कि भूविज्ञान के सिद्धांतों को आयुर्वेद में समाहित कर औषध निर्माण की शुद्धता और प्रभावशीलता को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया जा सकता है। उन्होंने स्वर्ण भस्म के जल में तैरने की क्षमता को उसके हाइड्रोलिक गुण से जोड़ते हुए heavy metal की भ्रांति को खंडित किया।

BHU – “Chemistry of Pottali”

पोट्टली कल्पना पर विशेष सत्र प्रो. नागराजा ने अपने दूसरे सत्र में “Chemistry of Pottali” विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पोट्टली कल्पना पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक रसायन विज्ञान के बीच सेतु का कार्य करती है, जिससे औषधियों की जैवउपलब्धता बढ़ती है और विषाक्तता घटती है।

आयोजन समिति और सहभागिता कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवाक्षी शर्मा और डॉ. अनुजा राणा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. एल. एन. गुप्ता ने प्रस्तुत किया। आयोजन अध्यक्ष प्रो. नम्रता जोशी, संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. रोहित शर्मा एवं डॉ. गुरुप्रसाद सी. निल्ले, कोषाध्यक्ष डॉ. शिवाक्षी शर्मा और डॉ. अनुजा राणा रहे।

इस अवसर पर डॉ. शशिरेखा, वैद्य सुशील कुमार दूबे, प्रो. शोभा भट्ट, प्रो. रानी सिंह, प्रो. विजय लक्ष्मी, प्रो. पी. एस. व्याडगी, प्रो. जे. एस. त्रिपाठी, डॉ. पी. एस. पाण्डे, डॉ. रामानंद सहित अनेक शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्पण से हुआ।

BHU