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City – गढ़ा कब्रिस्तान का मुद्दा आज भी अधूरा: मुस्लिम समाज की अनदेखी कब तक?

संपादकीय टीम 28 अगस्त 2025 को 01:43 pm बजे
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City – दिवंगत रिश्तेदारों को दफनाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने को मजबूर

City – बार-बार की अपीलों और मांगों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं

Jalandhar (City) – स्थानीय मुस्लिम समाज लंबे समय से गढ़ा कब्रिस्तान की दुर्दशा को लेकर परेशान है। आज तक गढ़ा कब्रिस्तान की चारदीवारी तक नहीं बनी, वहीं शव लेकर जाने का रास्ता इतना खराब है कि परिजनों को अंतिम संस्कार के समय भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्थिति यह है कि न तो पार्किंग की कोई व्यवस्था है और न ही सुरक्षित आने-जाने का रास्ता उपलब्ध है। कई सरकारें आईं, कई गईं, लेकिन गरहा कब्रिस्तान का मुद्दा आज भी वहीं का वहीं खड़ा है

मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख

हालात इतने बदतर हैं कि परिजन अपने दिवंगत रिश्तेदारों को दफनाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने को मजबूर हो जाते हैं। यह न केवल भावनात्मक रूप से भारी पड़ता है बल्कि परिवारों पर आर्थिक और सामाजिक बोझ भी बढ़ा देता है।

City – गढ़ा कब्रिस्तान की बदहाली बनी मुस्लिम समाज की सबसे बड़ी चिंता
किसी भी सरकार ने इस मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी

आवाज़ अनसुनी, सिर्फ़ आश्वासन

मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि कई बार सरकार से गुहार लगा चुके हैं, धरना-प्रदर्शन तक किए गए, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। किसी भी सरकार ने इस मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी। गढा कब्रिस्तान के मुद्दे को सुलझाने के लिए मुस्लिम डेमोक्रेटिक फ्रंट पंजाब अध्यक्ष अख्तर सलमानी, नौशाद सलमानी और उनके साथी लगातार मांग करते रहे हैं और उनकी मुहिम आज भी जारी है।

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